सुप्रीम कोर्ट ने इलेक्टोरल बॉंड मामले में SIT जांच की याचिका खारिज की
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने इलेक्टोरल बॉंड मामले में एसआईटी (SIT) जांच की मांग करने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि मौजूदा नियमों के तहत याचिका स्वीकार करना उचित नहीं है और याचिकाकर्ता उच्च न्यायालय का रुख कर सकते हैं। सुनवाई के दौरान, याचिकाकर्ता के वकील प्रशांत भूषण ने मामले को हवाला कांड और कोयला घोटाले की तरह बताया, जिसमें न केवल राजनीतिक दल, बल्कि प्रमुख जांच एजेंसियां भी शामिल हैं। उन्होंने इसे देश के इतिहास में सबसे गंभीर वित्तीय घोटालों में से एक करार दिया।
सीजेआई ने सामान्य प्रक्रिया का पालन करने का निर्देश दिया और कहा कि योजना को रद्द कर दिया गया है। भूषण ने दलील दी कि इसमें सरकारें, सत्तारूढ़ दल और शीर्ष कॉर्पोरेट घराने शामिल हैं। उन्होंने कुछ मामलों में सीबीआई अधिकारियों की भूमिका की जांच की आवश्यकता पर भी जोर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से इस मामले में डेटा के बारे में सवाल किया था, जिसके जवाब में चुनाव आयोग ने बताया कि उसके पास डेटा की जानकारी नहीं है। इसके बाद, चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली बेंच ने सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री से डेटा को वापस लौटाने का निर्देश दिया। चुनाव आयोग ने 2019 और 2023 में सिलबंद लिफाफे में जानकारी प्रदान की थी।
इसमें 763 पृष्ठों की दो सूचियाँ थीं, एक में बॉंड खरीदने वालों की जानकारी थी और दूसरी में बॉंड को भुनाने वालों की जानकारी शामिल थी। 2022-23 में बीजेपी को छोड़कर सभी प्रमुख दलों को कम चंदा मिला। इलेक्टोरल बॉंड्स के माध्यम से कोई भी संस्थान, कंपनी या व्यक्ति किसी राजनीतिक दल को चंदे के रूप में पैसे दे सकता है। विभिन्न मूल्यों के इलेक्टोरल बॉंड उपलब्ध हैं और खरीदने वालों की पहचान गुप्त रखी जाती है। कोई भी राजनीतिक पार्टी बॉंड मिलने के 15 दिनों के भीतर इन्हें भुना सकती है, और ये बॉंड केवल पंजीकृत राजनीतिक पार्टियों को ही दिए जा सकते हैं।