नयी दिल्ली, 06 सितंबर उच्चतम न्यायालय ने तमिलनाडु के मंत्रियों - के.के.एस.आर. रामचंद्रन और थंगम थेन्नारासु तथा उनके परिवार के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति रखने से संबंधित भ्रष्टाचार के आरोपों को बहाल करने के मद्रास उच्च न्यायालय आदेश पर शुक्रवार को रोक लगा दी।
न्यायमूर्ति ऋषिकेश रॉय और न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने संबंधित पक्षों की दलीलें सुनने के बाद उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगाने संबंधी यह आदेश पारित किया।
पीठ ने उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर तमिलनाडु सरकार को नोटिस जारी किया।
वरिष्ठ अधिवक्ताओं - मुकुल रोहतगी, ए.एम. सिंघवी, कपिल सिब्बल, सिद्धार्थ लूथरा और एस. मुरलीधर ने दलील दी कि उच्च न्यायालय सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक निदेशालय (डीवीएसी) द्वारा दायर क्लोजर रिपोर्ट को आपराधिक पुनरीक्षण में खारिज नहीं कर सकता था।
उन्होंने यह भी कहा कि स्वत: संज्ञान में लिया गया आपराधिक मामला उच्च न्यायालय के रोस्टर के अनुसार एक खंडपीठ के समक्ष प्रस्तुत किया जाना था। एक अधिवक्ता ने यह भी दलील दी कि उच्च ने आरोप तय करने का निर्देश देकर अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन किया है।
तमिलनाडु सरकार के अधिवक्ता ने कहा कि वह उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ विशेष अनुमति याचिका दायर करेंगे।
उच्च न्यायालय ने अगस्त में विशेष अदालतों के पिछले आदेशों को पलट दिया था, जिसमें तमिलनाडु के राजस्व और आपदा प्रबंधन मंत्री के के एस एस आर रामचंद्रन और मानव संसाधन प्रबंधन मंत्री थंगम थेनारासु को भ्रष्टाचार के मामलों से मुक्त कर दिया गया था।
रामचंद्रन ने कथित तौर पर 2006-2011 के डीएमके शासन के दौरान स्वास्थ्य और पिछड़ा वर्ग मंत्री के रूप में अपनी पत्नी तथा दोस्त के साथ मिलकर आय से अधिक संपत्ति अर्जित की थी।
डीवीएसी ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रावधानों को लागू किया, लेकिन बाद में जुलाई 2023 में इसने कोई तय अपराध नहीं होने का हवाला देते हुए एक अंतिम रिपोर्ट दायर की। विशेष अदालत ने मंत्री को मुक्त कर दिया।
वर्ष 2006-2011 के डीएमके शासन में स्कूल शिक्षा मंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान थंगम थेनारासु और उनकी पत्नी ने कथित तौर पर आय से अधिक संपत्ति अर्जित की।
डीवीएसी ने विरुधुनगर और चेन्नई में उनके आवासों की तलाशी के बाद मामला दर्ज किया।
हालांकि, अंतिम रिपोर्ट में कोई अपराध न होने का संकेत मिलने के कारण दिसंबर 2023 में विशेष अदालत ने उन्हें आरोपमुक्त कर दिया।
न्यायमूर्ति एन आनंद वेंकटेश की उच्च न्यायालय की एकल न्यायाधीश पीठ ने अपने आदेश में यह भी कहा था कि आरोपियों द्वारा आरोपमुक्त करने के आवेदन का समर्थन करने के लिए डीवीएसी के प्रयासों से ‘उन्हें दोषमुक्त करने के उद्देश्य से समझौतापूर्ण जांच’ का संकेत मिलता है।
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