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Dainik Vishwamitra

गुरुवार ३ अप्रैल

साधुओं पर बयानबाजी मामले में ममता ने दिया मोदी को जवाब



कोलकाता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हमलों का जवाब देने के लिए ममता बनर्जी ने अपना चुनाव प्रचार कार्यक्रम बदल दिया और बिष्णुपुर चली गईं। रविवार को बिष्णुपुर में मंच से प्रधानमंत्री मोदी ने बंगाल की मुख्यमंत्री ममता पर 'मुस्लिम तुष्टिकरण' और 'संन्यासियों पर हमला' करने का आरोप लगाया। सोमवार दोपहर को बिष्णुपुर गईं ममता ने कहा, ''यहां मेरी कोई सभा नहीं थी। मेरी एक और सभा थी। वह मुझे गाली देने आये थे...! इसलिए मैं झूठ का जवाब देने के लिए 24 घंटे के नोटिस पर आई हूं।''
 
मोदी को जवाब देने के साथ ही ममता ने अपने 'विवादित' बयान पर भी सफाई दी। जैसा कि उन्होंने उस दिन कहा था, उन्होंने किसी संगठन को निशाना बनाकर कुछ नहीं कहा। उन्होंने उन संस्थाओं के 'व्यक्ति विशेष' के बारे में कहा था। यानी उन्होंने रामकृष्ण मिशन, भारत सेवाश्रम या इस्कॉन के बारे में 'राजनीति' करने या 'संस्थागत' तरीके से राजनीति में भाग लेने की बात नहीं की। उन्होंने उन सभी संस्थाओं के कुछ साधु-संन्यासियों के बारे में बताया। ममता ने उनमें से एक का नाम बताया था। वह अपने बयान पर अडिग हैं। घटना की शुरुआत शनिवार को आरामबाग में हुई ममता की रैली से हुई. वहां ममता ने रामकृष्ण मिशन और भारत सेवाश्रम संघ के कुछ संतों के खिलाफ 'आक्रामक' बयान दिया। उन्होंने खासतौर पर मुर्शिदाबाद के भारत सेवाश्रम संघ के कार्तिक महाराज का जिक्र करते हुए कहा, ''भारत सेवाश्रम संघ के प्रति मेरे मन में बहुत सम्मान था.'' लेकिन जो आदमी कहता है, मैं तृणमूल कांग्रेस के एजेंट को बैठने नहीं दूंगा, उसे मैं साधु नहीं मानती। कारण यह है कि वह 'प्रत्यक्ष राजनीति' करके देश को बर्बाद कर रहे हैं।'
 

मुख्यमंत्री की इस टिप्पणी पर बड़ा विवाद तब खड़ा हो गया, जब रविवार को  मोदी चुनाव प्रचार के लिए बंगाल आये तो उन्होंने अपनी तीनों सभाओं में ममता पर हमला करने के लिए स्वामी विवेकानन्द का जिक्र किया। प्रधानमंत्री ने कहा, 'यह देश भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद, स्वामी विवेकानंद और स्वामी प्रणबानंद जैसे आध्यात्मिक गुरुओं का अपमान कभी बर्दाश्त नहीं करेगा।'
 
उनका 'जवाब' ममता ने सोमवार को दिया- ''चुनाव के वक्त स्वामी विवेकानन्द दिखाने आये थे!'' सुनो, मैंने स्वामी विवेकानन्द का घर बचा लिया। बिक रहा था। मैंने इसे निगम से खरीदा था। तभी स्वामी विवेकानन्द का घर आज भी स्वामी विवेकानन्द का घर है। यह हमेशा रहेगा।''  ममता कहती रहीं, ''सिस्टर निवेदिता का घर किसने बचाया? मैंने बचाया सिस्टर निवेदिता का निधन दार्जिलिंग में हुआ। मैंने वह घर खरीद लिया। दक्षिणेश्वर मंदिर का स्काईवॉक किसने बनवाया था? बेलूर मठ का इतना घाट किसने बनवाया? मैंने वही किया जो उन्होंने कहा। जयरामबाटी में भी काम हुआ है। जयरामबाटी शारदा  मां का जन्मस्थान है। मैं वहां एक बार नहीं, हजारों बार गई हूं. आप (मोदी) कितनी बार गए हैं?”

 


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