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Dainik Vishwamitra

गुरुवार ३ अप्रैल

भारत-अमेरिका परमाणु साझेदारी को हरी झंडी, संयुक्त रूप से बनाएंगे न्यूक्लियर रिएक्टर




नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच 2007 में हुए असैन्य परमाणु समझौते को 18 साल बाद नई गति मिली है। अमेरिका के ऊर्जा विभाग (DoE) ने अमेरिकी कंपनियों को भारत में परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के डिजाइन और निर्माण की अंतिम मंजूरी दे दी है। यह कदम दोनों देशों के रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करेगा।

इससे पहले, भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौते के तहत अमेरिकी कंपनियां केवल परमाणु रिएक्टर और उपकरण निर्यात कर सकती थीं, लेकिन अब वे भारत में छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) के निर्माण और उसके सभी घटकों के सह-उत्पादन में भी भाग लेंगी।

समझौते में देरी और भारत की शर्तें
2007 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश द्वारा इस समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे, लेकिन इसे लागू करने में लगभग 20 साल लग गए। इस दौरान नियामक स्वीकृतियां, तकनीकी मंजूरी और दायित्व से जुड़ी शर्तों को अंतिम रूप दिया गया।

भारत लगातार इस बात पर जोर देता रहा कि परमाणु रिएक्टर का डिजाइन, निर्माण और तकनीकी हस्तांतरण भारत में ही हो। अंततः अमेरिका ने भारत की इन शर्तों को स्वीकार कर लिया।

अमेरिका ने रखी शर्त
अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि इन संयुक्त रूप से निर्मित रिएक्टरों को किसी अन्य देश को बिना अमेरिका की पूर्व लिखित सहमति के निर्यात नहीं किया जा सकेगा।


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