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Dainik Vishwamitra

गुरुवार ३ अप्रैल

फरक्का समझौते पर तृणमूल ने जताई आपत्ति, कहा - बंगाल को बेचने की योजना



 
 

कोलकाता। बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना की दिल्ली यात्रा के दौरान शनिवार को फरक्का समझौते का नवीनीकरण किया गया, जिसके 24 घंटे के अंदर ही बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल ने इस पर आपत्ति जताई है। इसमें मुख्य शिकायत यह है कि नवीनीकरण राज्य सरकार से अलग-थलग कर किया गया है। तृणमूल ने समझौते के नवीनीकरण को भी बंगाल को 'बेचने की योजना' बताया है। इसके साथ ही तीस्ता समझौते की याद दिलाकर तृणमूल की ओर से यह समझाया गया है कि राज्य को दरकिनार राज्य के हितों को नुकसान पहुंचाने वाला कोई भी काम करना आसान नहीं होगा। तृणमूल ने कहा है, ''फरक्का-गंगा समझौते में राज्य सरकार भी एक पक्ष है. लेकिन राज्य सरकार को नवीनीकरण की जानकारी नहीं दी गयी, जो बहुत बुरा है।” यह भी कहा गया है कि इस समझौते का पैसा भी राज्य सरकार का बकाया है। गंगा ड्रेजिंग का काम रुका हुआ है, जो बंगाल में बाढ़ और कटाव का मुख्य कारण बन गया है। 
1996 में भारत-बांग्लादेश ने गंगा जल पर एक समझौते पर हस्ताक्षर किये। इसमें कई राज्य सरकारें भी शामिल हैं. अनुबंध 2026 में समाप्त हो जाएगा। याद करते हुए तृणमूल का कहना है कि 2017 में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी फरक्का बांध का विरोध किया था. उन्होंने कहा, तटबंध से बाढ़ को नियंत्रित नहीं किया जा सकता.


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