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Dainik Vishwamitra

गुरुवार ३ अप्रैल

मंदारमनी के 'अवैध' होटलों पर तोड़फोड़ नहीं, हाई कोर्ट ने स्थगन आदेश की अवधि बढ़ाई




कोलकाता: मंदारमनी में 'अवैध' होटलों और लॉजों पर फिलहाल तोड़फोड़ नहीं होगी। मंगलवार को कोलकाता हाई कोर्ट ने इस मामले में स्थगन आदेश की अवधि 24 जनवरी तक बढ़ा दी। यानी 24 जनवरी तक मंदारमनी के किसी भी होटल या लॉज को नहीं तोड़ा जा सकेगा। यह आदेश न्यायमूर्ति जय सेनगुप्ता ने दिया। इस फैसले से होटल मालिकों में खुशी की लहर है। मामले की अगली सुनवाई 17 जनवरी को होगी।

मंदारमनी, जो कि एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल है, वहां समुद्र तट पर कई होटलों का निर्माण किया गया है। आरोप है कि इन होटलों ने दीवारों और बाड़ों से समुद्र तट को घेरकर पर्यटकों के मनोरंजन के लिए इनका उपयोग किया है। इस मुद्दे पर राष्ट्रीय पर्यावरण अदालत ने पूर्व मिदनापुर जिला प्रशासन को 20 नवंबर तक 100 से अधिक 'अवैध' निर्माणों को ढहाने का निर्देश दिया था। इसके विरोध में मंदारमनी होटल एसोसिएशन ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, और उनके पक्ष में वकील कल्याण बंद्योपाध्याय ने दलील दी थी।

इस मुद्दे पर राज्य प्रशासन और यहां तक कि मुख्य सचिव को भी जानकारी नहीं थी, जो बाद में सामने आया। इस पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने नाराजगी व्यक्त की और कहा कि बुलडोज़र कोई समाधान नहीं है। उन्होंने कहा, "बुलडोज़र नहीं चलेगा, हम होटल मालिकों से जल्दी बैठक करेंगे।" यह पहली बार नहीं है, 2022 में भी राष्ट्रीय पर्यावरण अदालत ने मंदारमनी के अवैध निर्माण को गिराने का आदेश दिया था, लेकिन वह आदेश उस समय स्थगित कर दिया गया था।

नवंबर 22 की सुनवाई में न्यायमूर्ति ने कहा था कि 30 दिसंबर तक किसी भी होटल या लॉज को नहीं तोड़ा जाएगा। मंगलवार की सुनवाई में न्यायमूर्ति ने आदेश दिया कि 24 जनवरी तक भी बुलडोज़र नहीं चलेगा। इस प्रकार, मंदारमनी में होटलों को तोड़ने के मामले में स्थगन आदेश की अवधि और बढ़ा दी गई है।


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