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Dainik Vishwamitra

गुरुवार ३ अप्रैल

झाड़ग्राम, अभी भी माओवादी 'प्रभावित' जिलों की सूची में शामिल




कोलकाता/नई दिल्ली। देश के 10 राज्यों में माओवादी गतिविधियों पर नियंत्रण के मामले में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राहत की सांस ली है। पश्चिम बंगाल में यह सफलता सबसे उल्लेखनीय मानी जा रही है। लेकिन इस बीच झाड़ग्राम एक अपवाद बना हुआ है। यह जिला अभी भी केंद्रीय गृह मंत्रालय की 'प्रभावित' जिलों की सूची में शामिल है, जबकि यहां कई वर्षों से कोई माओवादी हिंसा नहीं हुई।  

माओवादी प्रभाव के आंकड़े
संसद के शीतकालीन सत्र में तीन सांसदों ने केंद्रीय गृह मंत्री से माओवादी प्रभाव वाले जिलों के बारे में सवाल किया। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने बताया कि 2010 में 10 राज्यों के 126 जिलों को माओवादी 'प्रभावित' घोषित किया गया था। अब यह संख्या घटकर केवल 38 रह गई है।  

छत्तीसगढ़ माओवादी प्रभाव के मामले में पहले स्थान पर है, जहां 15 जिले अब भी 'प्रभावित' हैं। इसके बाद ओडिशा के 7 और झारखंड के 5 जिले हैं। पश्चिम बंगाल में माओवादी प्रभाव सबसे कम है, लेकिन झाड़ग्राम अभी भी 'प्रभावित' जिलों की सूची में शामिल है।  

 झाड़ग्राम का मामला क्यों अलग? 
झाड़ग्राम के 'प्रभावित' बने रहने के सवाल पर जिले के पुलिस अधीक्षक ओरिजीत सिंह ने कहा, "हम लगातार सतर्क हैं और क्षेत्र में निगरानी जारी है। केंद्रीय बलों के साथ समन्वय में अभियानों को अंजाम दिया जा रहा है।" हालांकि, उन्होंने निगरानी और अभियानों के विवरण साझा नहीं किए।  

2010 में माओवादी हिंसा चरम पर थी, जिसमें 1,005 लोग मारे गए थे। उस समय पश्चिम बंगाल के पांच जिलों—झाड़ग्राम, पश्चिम मेदिनीपुर, बांकुड़ा, पुरुलिया और बीरभूम—को 'प्रभावित' घोषित किया गया था। 2024 में गृह मंत्रालय ने बताया कि अब केवल झाड़ग्राम इस सूची में है।  

 माओवादी प्रभाव में गिरावट  
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, 2011 में बुड़ीशोल जंगल में माओवादी नेता किशनजी के एनकाउंटर के बाद झाड़ग्राम में माओवादी गतिविधियां तेजी से घटीं। इसके बाद राघुराम, जगरी बास्के और सुचित्रा महतो जैसे प्रमुख माओवादी नेताओं के आत्मसमर्पण ने इन गतिविधियों पर पूरी तरह से लगाम लगाई।  

हालांकि, 2024 की शुरुआत में झाड़ग्राम में माओवादी पोस्टर पाए गए थे। लेकिन जांच से पता चला कि यह पोस्टर सीपीआई (माओवादी) के नाम पर पैसा वसूलने की कोशिश का हिस्सा थे। पुलिस ने इस मामले में 30 लोगों को गिरफ्तार किया, लेकिन वे असली माओवादी नहीं थे।  

 अब भी क्यों सूची में है झाड़ग्राम?
माओवादी 'प्रभावित' जिलों की पहचान के लिए केंद्र सरकार हिंसक घटनाओं, खुफिया रिपोर्टों और सामूहिक संगठनों की गतिविधियों जैसे मापदंडों पर विचार करती है। पुलिस का कहना है कि झाड़ग्राम में माओवादी प्रभाव खत्म हो चुका है। फिर भी, ऐतिहासिक गतिविधियों और सतर्कता के चलते यह जिला अब भी 'प्रभावित' सूची में बना हुआ है।  

झाड़ग्राम को 'प्रभावित' सूची से बाहर करने के लिए इस क्षेत्र में अधिक स्पष्टता और गहन मूल्यांकन की आवश्यकता है, ताकि बंगाल की सफलता की तस्वीर पूरी तरह से साफ हो सके।


स्थानीय