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Dainik Vishwamitra

गुरुवार ३ अप्रैल

बंगाल में भाजपा संकट में, 12 विधायक हाथ से निकले, 8 और असंतुष्ट



कोलकाता। पश्चिम बंगाल में भाजपा की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। एक समय 77 विधायकों वाली पार्टी अब 65 पर सिमट गई है। इस्तीफे, दल-बदल और आंतरिक असंतोष की वजह से पार्टी के लिए हालात मुश्किल होते जा रहे हैं। हाल ही में भाजपा की विधायक तापसी मंडल ने पार्टी छोड़कर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का दामन थाम लिया। इससे पार्टी में तनाव और बढ़ गया है।

भाजपा सूत्रों के अनुसार, आठ और विधायक असंतुष्ट हैं, जिनकी गतिविधियां पार्टी के लिए चिंता का कारण बनी हुई हैं। असंतोष की यह स्थिति उत्तर बंगाल, राढ़ बंगाल और मतुआ बहुल क्षेत्रों में अधिक देखने को मिल रही है।

राज्य में भाजपा छोड़ने वाले विधायकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। शुरुआत में ही दो भाजपा विधायकों ने, जो सांसद भी थे, इस्तीफा देकर पार्टी छोड़ दी थी, जिससे भाजपा के विधायकों की संख्या 75 रह गई। इसके बाद आठ और विधायकों ने भाजपा का साथ छोड़ दिया और एक विधायक का निधन हो गया। अब पार्टी के पास कुल 65 विधायक ही बचे हैं।

उत्तर बंगाल में भी भाजपा संकट में है। कार्शियांग के विधायक विष्णु प्रसाद शर्मा पार्टी से असंतुष्ट हैं। वे पहाड़ के लिए विशेष दर्जे और अलग राज्य की मांग कर रहे हैं, जिससे भाजपा नेतृत्व असहज महसूस कर रहा है। इसी तरह, कालियागंज के विधायक सौमेन राय पहले टीएमसी में गए, फिर वापस भाजपा में लौटे, लेकिन उनकी वफादारी भाजपा के बजाय अनंत महाराज के प्रति अधिक मानी जा रही है। भाजपा को संदेह है कि वे फिर से पाला बदल सकते हैं। दक्षिण दिनाजपुर में भी पार्टी के कई विधायक नेतृत्व से नाराज चल रहे हैं और खुलकर असंतोष जता रहे हैं।

मतुआ समुदाय बहुल इलाकों, विशेषकर नदिया और उत्तर 24 परगना जिलों में भी भाजपा को संकट का सामना करना पड़ रहा है। यहां के कई भाजपा विधायक नेतृत्व से नाराज हैं। लोकसभा चुनाव से पहले कुछ को टिकट देकर रोका गया था, लेकिन उनमें से कई हार गए। अब पार्टी को डर है कि वे फिर से टीएमसी में न चले जाएं।

राढ़ बंगाल में भी भाजपा में असंतोष बढ़ता जा रहा है। हुगली-बांकुरा सीमा के एक विधायक हाल के दिनों में पार्टी को लेकर तटस्थ बयान दे रहे हैं, जिससे उनके दल-बदल की अटकलें तेज हो गई हैं। वहीं, एक अन्य वरिष्ठ विधायक भी पार्टी नेतृत्व से नाखुश हैं और उनकी नाराजगी किसी से छिपी नहीं है।

भाजपा 2026 के विधानसभा चुनावों की तैयारी में जुटना चाहती है, लेकिन हालिया घटनाक्रमों ने उसे बड़ा झटका दिया है। तापसी मंडल का पार्टी छोड़ना और आठ अन्य विधायकों की असंतोष भरी गतिविधियां भाजपा के लिए खतरे की घंटी हैं। पार्टी नेतृत्व अब इन असंतुष्ट विधायकों पर नजर बनाए हुए है, ताकि पार्टी में और टूट-फूट को रोका जा सके।


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