कोलकाता: पश्चिम बंगाल सरकार ने नगर पालिका और नगर निगमों में भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए सख्त कदम उठाया है। अब से सभी स्थायी पदों पर नियुक्ति अनिवार्य रूप से वेस्ट बंगाल म्युनिसिपल सर्विस कमीशन के माध्यम से की जाएगी। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हाल ही में नबान्न हुई बैठक में स्पष्ट निर्देश दिया कि किसी भी स्थानीय निकाय को स्वतंत्र रूप से भर्ती करने की अनुमति नहीं होगी। इसके बाद नगर विकास विभाग ने तुरंत निर्देशिका जारी कर दी।
पश्चिम बंगाल म्युनिसिपल सर्विस कमीशन कानून 2018-19 के तहत इस आयोग का गठन किया गया था, जिसका उद्देश्य नगर पालिका और नगर निगमों में निष्पक्ष और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया सुनिश्चित करना है। नए नियम के तहत अब नगर निगमों, नगर पालिकाओं, औद्योगिक विकास बोर्डों और शहरी विकास संगठनों में सभी स्थायी पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया म्युनिसिपल सर्विस कमीशन द्वारा आयोजित परीक्षा और मेरिट लिस्ट के आधार पर पूरी की जाएगी।
नगर निगमों में भर्ती घोटालों की शिकायतों के बाद यह निर्णय लिया गया है। हाल ही में सीबीआई और ईडी ने कई नगर पालिकाओं में भर्ती अनियमितताओं की जांच की थी, जिसमें बैरकपुर, कामरहटी, टिटागढ़ और भाटपाड़ा जैसी जगहों पर भ्रष्टाचार उजागर हुआ था। कई मामलों में नगर पालिका अध्यक्षों और स्थानीय नेताओं द्वारा अवैध रूप से भर्ती किए जाने के आरोप लगे थे। सरकार के इस फैसले से भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और स्थानीय राजनीतिक हस्तक्षेप पर रोक लगेगी।
नगर विकास विभाग द्वारा जारी निर्देशिका के अनुसार, अब नगर निगम, नगर पालिका, औद्योगिक विकास बोर्ड और शहरी विकास संगठनों में कोई भी स्थायी भर्ती सीधे नहीं की जाएगी। भर्ती प्रक्रिया म्युनिसिपल सर्विस कमीशन की परीक्षा और मेरिट लिस्ट के आधार पर होगी। संविदा आधारित भर्ती के लिए भी नगर विकास और वित्त विभाग की अनुमति अनिवार्य होगी।
नगर विकास विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस फैसले से नगर निकायों में होने वाली अनियमितताओं पर लगाम लगेगी। सरकार चाहती है कि भर्ती प्रक्रिया में कोई भी भ्रष्टाचार न हो और योग्य उम्मीदवारों को ही नौकरी मिले। स्थानीय स्तर पर भर्ती की प्रक्रिया में कई बार पारदर्शिता नहीं होती, जिससे अनियमितताओं की शिकायतें बढ़ जाती हैं। अब आयोग के माध्यम से परीक्षा और मेरिट के आधार पर भर्ती होने से योग्य उम्मीदवारों को लाभ मिलेगा और राजनीतिक हस्तक्षेप को कम किया जा सकेगा।
इससे पहले, कोलकाता हाई कोर्ट ने भी म्युनिसिपल सर्विस कमीशन के माध्यम से भर्ती करने के पक्ष में फैसला दिया था। अदालत ने निर्देश दिया था कि आयोग के माध्यम से भर्ती प्रक्रिया को अनिवार्य किया जाए, जिससे नियुक्तियों में पारदर्शिता बनी रहे। सरकार के इस सख्त फैसले के बाद माना जा रहा है कि नगर निगमों में अवैध भर्तियों और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा।
नगर विकास मंत्री फिरहाद हाकिम, जो खुद कोलकाता नगर निगम के मेयर भी हैं, ने भी इस फैसले का समर्थन किया है। सरकार को भरोसा है कि इस फैसले से नगर निगम और नगर पालिकाओं की भर्ती प्रणाली अधिक पारदर्शी होगी, जिससे योग्य उम्मीदवारों को अवसर मिलेगा और जनता का भरोसा प्रशासन पर मजबूत होगा।
नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच 2007 में हुए असैन्य परमाणु समझौते को 18 साल बाद नई गति मिली है। अमेरिका के ऊर्जा विभाग (DoE) ने अमेरिकी कंपनियों को भारत में परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के डिजाइन और निर्माण की अंतिम मंजूरी दे दी है। यह कदम दोनों देशों के रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करेगा।
पाथरप्रतिमा: सोमवार रात दक्षिण 24 परगना के पाथरप्रतिमा में बणिक परिवार के घर में हुए भीषण विस्फोट और आगजनी में परिवार के सात सदस्यों की दर्दनाक मौत हो गई। मृतकों में चार बच्चे भी शामिल हैं, जिनमें दो नवजात थे। इस हादसे में परिवार की एक महिला सदस्य गंभीर रूप से घायल हैं और अस्पताल में भर्ती हैं। पुलिस के अनुसार, यह विस्फोट घर में रखे पटाखों के कारण हुआ।
रेड रोड पर ईद-नमाज में ममता बनर्जी के साथ अभिषेक भी पहुंचे