बंगाल सौहार्द्र की धरती : ममता
- यहां सभी धर्मों और समुदायों का सम्मान
कोलकाता : मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को लगभग एक दशक बाद फुरफुरा शरीफ का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने राज्य में सौहार्द्र और एकता का संदेश देते हुए कहा, "बंगाल सौहार्द्र की धरती है, यहां सभी धर्मों और समुदायों का सम्मान किया जाता है।"
मुख्यमंत्री के इस दौरे को लेकर विपक्षी दलों ने उन पर राजनीतिक लाभ लेने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए ममता बनर्जी मुस्लिम मतदाताओं को लुभाने के लिए फुरफुरा शरीफ पहुंची हैं। हालांकि, ममता बनर्जी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि उनका यह दौरा पूरी तरह सौहार्द्र और भाईचारे को मजबूत करने के लिए है।
उन्होंने मंच से कहा, "मैं जैसे होली की शुभकामनाएं देती हूं, वैसे ही रमजान की भी शुभकामनाएं देती हूं। जब मैं दुर्गा पूजा या काली पूजा में शामिल होती हूं, तब कोई सवाल नहीं उठाता। जब लोग काशी विश्वनाथ या पुष्कर जाते हैं, तब भी कोई सवाल नहीं करता, लेकिन जब मैं फुरफुरा शरीफ आती हूं, तो राजनीतिक आरोप लगाए जाते हैं।"
ममता बनर्जी ने अपने संबोधन में राज्य में सौहार्द्र बनाए रखने की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा, " यहां किसी भी प्रकार की सांप्रदायिकता को बढ़ावा नहीं दिया जाएगा।मैं सभी के लिए दुआ कर रही हूं कि बंगाल में शांति, एकता और भाईचारा बना रहे। सभी लोग खुशहाल रहें।"
फुरफुरा शरीफ के स्थानीय निवासियों ने मुख्यमंत्री के दौरे का स्वागत किया और क्षेत्र में हुए विकास कार्यों की सराहना की। एक निवासी ने कहा, "अब फुरफुरा पहले जैसा नहीं रहा। यहां जबरदस्त विकास हुआ है। मुख्यमंत्री की पहल से पूरे क्षेत्र का कायाकल्प हुआ है। जो लोग कहते हैं कि कोई काम नहीं हुआ, वे गलत कह रहे हैं।"
होली के बाद मुख्यमंत्री का यह दौरा फुरफुरा शरीफ के पीरजादा से मुलाकात के लिए था। उन्होंने वहां विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की और समुदाय के लोगों से संवाद किया। इस दौरे को राज्य में सामाजिक समरसता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
ममता बनर्जी के इस दौरे को लेकर राजनीतिक गलियारों में भी हलचल मची हुई है। जहां एक ओर तृणमूल कांग्रेस इसे सौहार्द्र का संदेश बता रही है, वहीं विपक्ष इसे चुनावी रणनीति करार दे रहा है। हालांकि, मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कर दिया कि उनका उद्देश्य केवल राज्य में शांति और एकता बनाए रखना है, न कि राजनीतिक लाभ लेना।