उद्योगों के लिए नई Land Policy बनाएगी ममता सरकार
कोलकाता: राज्य में औद्योगिक विकास को गति देने के लिए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भूमि नीति में बदलाव करने की घोषणा की है। उन्होंने विधानसभा में कहा कि 2011 में सत्ता परिवर्तन के बाद राज्य में कई छोटे-बड़े उद्योग स्थापित हुए हैं, लेकिन कुछ मामलों में मौजूदा भूमि नीति के कारण उद्योगों की स्थापना में देरी हो रही है। इसे देखते हुए सरकार नई नीति लाने की तैयारी कर रही है।
बुधवार को विधानसभा में स्वास्थ्य बजट चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि पुरानी भूमि अधिग्रहण नीतियों के कारण अब भी सरकार को मुआवजा देना पड़ रहा है। उन्होंने कहा, "1957 में अधिग्रहीत जमीन का मुआवजा आज तक देना पड़ रहा है। वाममोर्चा सरकार के दौरान भी बड़ी मात्रा में जमीन अधिग्रहित की गई थी, जिसका भुगतान अब तक किया जा रहा है। इससे ट्रेजरी पर बोझ बढ़ रहा है। अब इस स्थिति को बदलना होगा।"
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए नई भूमि नीति की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि राज्य में बड़े उद्योग आ रहे हैं, कई नए प्रोजेक्ट प्रस्तावित हैं और आईटी क्षेत्र का भी तेजी से विकास हो रहा है। इसी के मद्देनजर सरकार नई नीति तैयार कर रही है। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य सरकार पुराना भूमि अधिग्रहण कानून निरस्त कर राज्यपाल के पास भेजेगी और उनसे एक महीने के भीतर मंजूरी देने का अनुरोध करेगी।
मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि नई नीति के लिए मुख्य सचिव के नेतृत्व में एक कमेटी बनाई गई है, जिसमें विभिन्न उद्योग जगत के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे। इससे नई नीति लागू करने और नए प्रोजेक्ट लाने में आसानी होगी।
इसके अलावा, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि राज्य के कोयला खदानें केंद्र के अधीन हैं और उन्होंने केंद्र से इस संबंध में नीति बनाने की मांग की थी, लेकिन अब तक इस पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है।