भ्रष्टाचार पर सीएम योगी की सख्ती, अब तक 11 IAS अधिकारी निलंबित
लखनऊ। सौर ऊर्जा के कलपुर्जे निर्माण संयंत्र के लिए रिश्वत मांगने के आरोप में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इन्वेस्ट यूपी के सीईओ अभिषेक प्रकाश को निलंबित कर दिया है। जांच में प्रथमदृष्टया दोषी पाए जाने पर यह कार्रवाई की गई। योगी सरकार की भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत अब तक 11 आईएएस अधिकारियों को निलंबित किया जा चुका है।
निलंबित हुए अधिकारियों की सूची
घनश्याम सिंह (IAS, 2014 बैच) – लखीमपुर खीरी में भूमि पैमाइश मामले में निलंबित (13 नवंबर 2024), अब बहाल।
देवीशरण उपाध्याय (IAS, 2012 बैच) – अलीगढ़ में 35 भूखंडों के अवैध पट्टे बहाल करने के आरोप में निलंबित (जुलाई 2024)।
टीके शीबू (IAS, 2010 बैच) – सोनभद्र के डीएम रहते निलंबित (31 मार्च 2022), अब बहाल।
सुनील कुमार वर्मा – औरैया के डीएम रहते पद के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार के आरोप में निलंबित, अब बहाल।
देवेन्द्र कुमार पांडेय (IAS, 2011 बैच) – उन्नाव में डीएम रहते वित्तीय अनियमितताओं के कारण निलंबित, अब बहाल।
अमरनाथ उपाध्याय (IAS, 2011 बैच) – महाराजगंज के डीएम रहते गो-संरक्षण बजट में धांधली के आरोप में निलंबित, बाद में बहाल।
केदारनाथ सिंह – पर्यटन विभाग में रहते निलंबित।
शारदा सिंह – चकबंदी आयुक्त रहते भर्ती में ओबीसी कोटे की अनदेखी के कारण निलंबित।
जितेंद्र बहादुर सिंह – गोंडा के डीएम रहते सरकारी अनाज घोटाले के आरोप में निलंबित (जून 2018), अब सेवानिवृत्त।
कुमार प्रशांत (IAS, 2010 बैच) – फतेहपुर के डीएम रहते सरकारी गेहूं खरीद घोटाले में निलंबित (7 जून 2018), अब बहाल।
योगी सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जारी रखते हुए यह स्पष्ट कर दिया है कि गड़बड़ियों में लिप्त अधिकारियों को बख्शा नहीं जाएगा।