लोकसभा में वक्फ संशोधन बिल पर गरमाई बहस, TDP-जदयू का समर्थन, AIMPLB ने जताई आपत्ति
नई दिल्ली। लोकसभा में बुधवार को अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने वक्फ संशोधन बिल 2024 पेश किया, जिस पर करीब आठ घंटे की चर्चा हुई। बिल को केंद्र की सहयोगी पार्टियों TDP और जदयू ने समर्थन दिया, जबकि सपा नेता अखिलेश यादव ने इसका कड़ा विरोध किया। AIMPLB ने बिल को भेदभावपूर्ण बताते हुए देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी।
सरकार का पक्ष
मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि 2014 में UPA सरकार ने चुनाव से पहले दिल्ली वक्फ बोर्ड को 123 प्राइम प्रॉपर्टी ट्रांसफर कर दी थी, जो अल्पसंख्यक वोटों को साधने की कोशिश थी। उन्होंने कहा कि यदि यह संशोधन न लाया जाता तो संसद भवन समेत कई सरकारी इमारतों पर भी वक्फ का दावा किया जा सकता था।
भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने तीखा बयान देते हुए कहा, "भारत को वक्फ के खौफ से आजादी चाहिए। यहां बाबा साहेब अंबेडकर का संविधान चलेगा, मुगलिया फरमान नहीं।" उन्होंने आरोप लगाया कि वक्फ संपत्तियों पर कुछ लोगों का एकाधिकार है और इसे खत्म करने की जरूरत है।
विपक्ष का रुख
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बिल का विरोध करते हुए इसे "मुस्लिमों से उनकी संपत्तियां छीनने की साजिश" बताया। शिवसेना (UBT) सांसद अरविंद सावंत ने बिल पर स्पष्ट रुख नहीं लिया, जिस पर किरेन रिजिजू ने सवाल उठाया। सावंत ने मंदिरों की संपत्तियों की बिक्री का मुद्दा उठाते हुए कहा कि यदि सरकार वक्फ संपत्तियों को नियंत्रित कर रही है, तो मंदिरों की जमीनों पर भी कानून लाया जाना चाहिए।
AIMPLB का ऐलान - करेंगे आंदोलन
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने बिल का विरोध करते हुए कहा कि यदि यह पास हुआ तो देशभर में आंदोलन किया जाएगा। बोर्ड के प्रवक्ता डॉ. सैयद कासिम रसूल इलियास ने कहा कि वे इसके खिलाफ सभी संवैधानिक और कानूनी उपाय अपनाएंगे।
बिल के समर्थन में जदयू और टीडीपी
केंद्र सरकार में सहयोगी जदयू सांसद ललन सिंह ने कहा कि यह बिल मुसलमान विरोधी नहीं है, बल्कि पारदर्शिता लाने के लिए लाया गया है। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि "मोदीजी को कोसने से कुछ नहीं होगा, जनता ने उन्हें चुना है और वे सभी वर्गों के लिए काम कर रहे हैं।"
वोटिंग से पहले माहौल गर्माया
लोकसभा में बिल पर वोटिंग से पहले बहस और गरमा गई। भाजपा सांसदों ने जोर दिया कि यह कानून भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को रोकने के लिए लाया गया है, जबकि विपक्ष ने इसे समुदाय विशेष के खिलाफ बताया। AIMPLB की आंदोलन की धमकी के बाद देशभर में इस मुद्दे पर हलचल बढ़ गई है।