राज्यसभा में अमित शाह का आक्रामक रुख, आतंकवाद पर सख्त संदेश, विपक्ष को भी घेरा
नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में गृह मंत्रालय के कार्यों पर चर्चा के दौरान आतंकवाद, नक्सलवाद और उग्रवाद पर कड़ा रुख अपनाते हुए सरकार की "जीरो टॉलरेंस" नीति को दोहराया। उन्होंने कहा कि बीते चार दशकों में देश के सामने तीन गंभीर चुनौतियां रही हैं—आतंकवाद, नक्सलवाद और पूर्वोत्तर उग्रवाद, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने इन पर निर्णायक प्रहार किया है।
विपक्ष पर हमला, अनुच्छेद 370 का किया जिक्र
अपने संबोधन में अमित शाह ने कांग्रेस सहित विपक्षी दलों पर भी निशाना साधा। उन्होंने अनुच्छेद 370 को लेकर कहा कि पिछली सरकारों ने इसे हटाने में कोई इच्छाशक्ति नहीं दिखाई, लेकिन मोदी सरकार ने इसे समाप्त कर जम्मू-कश्मीर को मुख्यधारा से जोड़ा। उन्होंने कहा कि सुरक्षा के क्षेत्र में सरकार ने बड़े बदलाव किए हैं, जिससे नक्सली हिंसा और आतंकवादी घटनाओं में भारी कमी आई है।
‘आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए बलिदान देने वालों का सम्मान’
अमित शाह ने सदन में चर्चा के दौरान उन सुरक्षाकर्मियों का विशेष रूप से आभार व्यक्त किया, जिन्होंने देश की आंतरिक सुरक्षा और सीमाओं की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया है। उन्होंने कहा कि राज्य पुलिस और केंद्रीय अर्धसैनिक बलों ने अपने साहस से भारत को सुरक्षित बनाए रखा है।
‘अपराध अब सीमाओं तक सीमित नहीं’
गृह मंत्री ने कहा कि वर्तमान में अपराधों का स्वरूप बदल रहा है और अब वे एक राज्य तक सीमित नहीं रहते, बल्कि अंतरराज्यीय और बहुराज्यीय रूप ले चुके हैं। उन्होंने नारकोटिक्स, साइबर अपराध, संगठित अपराध और हवाला जैसे मुद्दों का जिक्र करते हुए कहा कि इन चुनौतियों से निपटने के लिए समन्वय और नीतिगत बदलाव की जरूरत है।
‘गृह मंत्रालय में ऐतिहासिक बदलाव किए गए’
अमित शाह ने जोर देकर कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए गृह मंत्रालय में महत्वपूर्ण सुधार किए गए हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले दस वर्षों में ऐसे कई सुधार किए गए हैं, जिनकी जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के लिए सरकार आगे भी कठोर कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगी।