1 अप्रैल से राज्य सरकारी कर्मचारियों को मिलेगा बढ़ा हुआ डीए, नबान्न ने जारी की अधिसूचना, सुप्रीम कोर्ट में फिर टली सुनवाई
कोलकाता: राज्य सरकार के कर्मचारियों को 1 अप्रैल से चार प्रतिशत बढ़ा हुआ महंगाई भत्ता (डीए) मिलेगा। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार ने बजट भाषण के दौरान इस वृद्धि की घोषणा की थी। मंगलवार को नबान्न ने एक अधिसूचना जारी कर इसकी आधिकारिक पुष्टि कर दी। इसके साथ ही राज्य कर्मचारियों का डीए बढ़कर 18 प्रतिशत हो गया है। पेंशनभोगियों को भी इसका लाभ मिलेगा, जिनका महंगाई राहत (डीआर) भी 18 प्रतिशत कर दिया गया है।
इस बीच, सुप्रीम कोर्ट में डीए मामले की सुनवाई एक बार फिर टल गई। अब यह मामला अप्रैल महीने में सुना जा सकता है। न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने राज्य सरकार से पूछा कि उनकी याचिका स्वीकार क्यों की जाए और इसे खारिज क्यों न किया जाए। अगली सुनवाई में इस पर राज्य सरकार को जवाब देना होगा।
केंद्र सरकार के कर्मचारियों की तुलना में पश्चिम बंगाल सरकार के कर्मचारियों के डीए में अब भी 35 प्रतिशत का अंतर बना हुआ है। राज्य सरकार की अधिसूचना जारी होने के बाद भी सरकारी कर्मचारियों के वामपंथी संगठनों ने असंतोष जताया है। उन्होंने अपने निहित डीए की मांग को लेकर 7 से 9 अप्रैल तक राज्यभर में सरकारी कार्यालयों में तीन घंटे की हड़ताल की घोषणा की है। हालांकि, तृणमूल कर्मचारी संघ ने सरकार के इस कदम का स्वागत किया है।
पिछले महीने 12 फरवरी को राज्य के वित्त राज्यमंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने बजट भाषण में राज्य कर्मचारियों के डीए में चार प्रतिशत वृद्धि की घोषणा की थी। मंगलवार को नबान्न ने अधिसूचना जारी कर इसे लागू करने की सूचना दी। अधिसूचना के अनुसार, राज्य सरकार के कर्मचारियों के अलावा, सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों के शिक्षक और गैर-शिक्षण कर्मचारी, सरकार द्वारा नियंत्रित पेंशनधारी, पंचायत और नगर पालिका के कर्मचारी भी इस डीए वृद्धि का लाभ उठाएंगे। सभी को 1 अप्रैल से बढ़ा हुआ डीए मिलेगा।
हालांकि, इस वृद्धि को लेकर वामपंथी कर्मचारी संगठनों ने नाराजगी जताई है। कोऑर्डिनेशन कमेटी के विश्वजीत गुप्ता चौधरी ने कहा, "39 प्रतिशत डीए बकाया था, लेकिन केवल 4 प्रतिशत दिया गया है। अभी भी भारी मात्रा में डीए लंबित है। सरकार की इस घोषणा से हम संतुष्ट नहीं हैं। बंगाल के कर्मचारी सबसे अधिक उपेक्षित हैं। उचित डीए की मांग को लेकर हम 7-9 अप्रैल तक राज्यभर में सरकारी दफ्तरों में तीन घंटे की हड़ताल करेंगे।" वहीं, संघर्षशील संयुक्त मंच के संयोजक भास्कर घोष ने कहा, "सरकार ने अपेक्षाकृत बहुत कम डीए दिया है, जो बाजार मूल्य से मेल नहीं खाता। केंद्र सरकार या अन्य राज्यों की तुलना में यह वृद्धि नगण्य है।" बंगीय शिक्षक एवं शिक्षा समिति के प्रतिनिधि स्वपन मंडल ने भी असंतोष जाहिर करते हुए कहा, "सरकार ने बजट में सिर्फ 4 प्रतिशत डीए वृद्धि की घोषणा की, जबकि 39 प्रतिशत अभी भी बकाया है। हम इस फैसले से संतुष्ट नहीं हैं।"
दूसरी ओर, तृणमूल कर्मचारी महासंघ के संयोजक प्रताप नायक ने मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा, "मुख्यमंत्री ने बजट में डीए वृद्धि का वादा किया था और उसे पूरा किया है। 1 अप्रैल से सरकारी कर्मचारियों को चार प्रतिशत अधिक डीए मिलेगा। विरोध करने वालों को यह समझना चाहिए कि केंद्र सरकार ने राज्य को आर्थिक रूप से वंचित किया है, फिर भी मुख्यमंत्री हर साल डीए बढ़ा रही हैं।"
इस बीच, सुप्रीम कोर्ट में डीए मामले की सुनवाई मंगलवार को होनी थी, लेकिन फिर टल गई। न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने कहा कि इस मामले की अगली सुनवाई अप्रैल में होगी। राज्य के वकील कपिल सिब्बल से पीठ ने पूछा कि राज्य सरकार की याचिका को क्यों स्वीकार किया जाए और इसे खारिज क्यों न किया जाए। अधिवक्ता बिकास रंजन भट्टाचार्य और फिरदौस शमीम ने सुप्रीम कोर्ट में डीए मामले की त्वरित सुनवाई की अपील की। उनका कहना था कि यह मामला लंबे समय से लंबित है, इसलिए जल्द से जल्द सुनवाई की जानी चाहिए।
इससे पहले, यह मामला न्यायमूर्ति हृषिकेश रॉय की पीठ के समक्ष था। लेकिन उनके सेवानिवृत्त होने के कारण यह पिछले तीन महीनों से स्थगित पड़ा था। अब यह मामला न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ के समक्ष आया है। उल्लेखनीय है कि कोलकाता हाई कोर्ट ने अपने फैसले में राज्य सरकार को केंद्र सरकार की दर से डीए देने का आदेश दिया था। लेकिन राज्य सरकार ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। 2022 के दिसंबर में राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी, लेकिन करीब तीन साल बाद भी इस मामले की नियमित सुनवाई शुरू नहीं हो सकी है। अब यह सुनवाई 22 अप्रैल को हो सकती है।