नयी दिल्ली 16 नवंबर भारत ने कनाडा में वेंकूवर में 12 नवंबर को भारतीय वाणिज्य दूतावास के काॅन्सुलर शिविर पर हमलों को लेकर चिंता जताते हुए कनाडा सरकार को विएना संधि के सम्मान सुनिश्चित करने की नसीहत दी है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने आज यहां नियमित ब्रीफिंग में कनाडा की घटनाओं के बारे में सवालों के जवाब में कहा, “कनाडा में हमारा उच्चायोग और वाणिज्य दूतावास नियमित रूप से कांसुलर शिविरों का आयोजन करते हैं। ऐसा ही एक शिविर पेंशनभोगियों को जीवन प्रमाण पत्र प्रदान करने के लिए 12 नवंबर को वैंकूवर के पास आयोजित किया गया था। कुछ कट्टरपंथी तत्वों के परेशानी पैदा करने के प्रयासों के बावजूद यह कार्यक्रम सफलतापूर्वक आयोजित किया गया था। सौभाग्य से हमारे महावाणिज्य दूत उस वक्त उस स्थल पर मौजूद नहीं थे। हम राष्ट्रों को राजनयिक संबंधों पर वियना कन्वेंशन का सम्मान करने की आवश्यकता दोहराते हैं ताकि हमारे राजनयिक अपने राजनयिक दायित्वों का सुचारु रूप से निर्वहन कर सकें।”
श्री बागची ने कहा, “जहां तक उन घटनाओं का सवाल है जो दिवाली में ब्रैम्पटन या मिसिसॉगा के पास हुईं थीं। मुझे लगता है कि यह दोनों समूहों के बीच अशांति की प्रकृति में था। ईमानदारी से कहूं तो, मुझे नहीं लगता कि हमारे वाणिज्य दूतावास को कोई शिकायत मिली है। मैंने कुछ सोशल मीडिया रिपोर्टें देखीं। हम यह भी समझते हैं कि वहां के अधिकारी उस घटना की जांच कर रहे हैं, इसलिए इसमें कहने के लिए और कुछ नहीं है।”
वॉशिंगटन/नई दिल्ली – अमेरिका की संघीय सरकार द्वारा गठित यूएस कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम (USCIRF) ने भारतीय खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की है। मंगलवार को जारी अपनी वार्षिक रिपोर्ट में आयोग ने आरोप लगाया कि भारतीय खुफिया एजेंसी का संबंध सिख अलगाववादियों की हत्या की साजिशों से है। रिपोर्ट में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी पार्टी भाजपा का भी जिक्र किया गया है।
ढाका: बांग्लादेश की राजधानी ढाका को बदलने की मांग लगातार जोर पकड़ रही है। बढ़ती जनसंख्या, अव्यवस्थित शहरीकरण, ट्रैफिक जाम और बुनियादी सुविधाओं की कमी ने लोगों का जीना दुश्वार कर दिया है। स्थानीय नागरिकों और विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान परिस्थितियों में ढाका अब रहने योग्य नहीं रह गया है और देश को एक नई राजधानी की आवश्यकता है।
इस्लामाबाद। पाकिस्तान को एक और बड़ी कूटनीतिक शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा है। तुर्कमेनिस्तान में पाकिस्तान के राजदूत के.के. अहसान वगान को अमेरिका में प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई और उन्हें एयरपोर्ट से ही डिपोर्ट कर दिया गया। पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वगान लॉस एंजेलिस की निजी यात्रा पर थे, लेकिन अमेरिकी अधिकारियों ने इमिग्रेशन नियमों का हवाला देते हुए उन्हें देश में दाखिल होने से रोक दिया।