बांग्लादेश में राजधानी बदलने की मांग तेज, आम जनता ने उठाए सवाल
ढाका: बांग्लादेश की राजधानी ढाका को बदलने की मांग लगातार जोर पकड़ रही है। बढ़ती जनसंख्या, अव्यवस्थित शहरीकरण, ट्रैफिक जाम और बुनियादी सुविधाओं की कमी ने लोगों का जीना दुश्वार कर दिया है। स्थानीय नागरिकों और विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान परिस्थितियों में ढाका अब रहने योग्य नहीं रह गया है और देश को एक नई राजधानी की आवश्यकता है।
ढाका में जीवन हुआ मुश्किल
306 वर्ग किलोमीटर में फैले इस शहर में एक करोड़ से अधिक लोग रहते हैं, जिनमें से अधिकांश बुनियादी सुविधाओं के अभाव से परेशान हैं। स्वच्छ पेयजल की कमी, धूल-मिट्टी, टूटी सड़कें, बेहाल ट्रैफिक और कमजोर कानून-व्यवस्था ने हालात बदतर बना दिए हैं। ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, स्थानीय नागरिक अब इसे रहने योग्य नहीं मानते।
बिजनेसमैन जाहिदुर रहमान का कहना है, "यह शहर अब रहने लायक नहीं रहा। अगर मेरा काम यहां न होता, तो मैं बहुत पहले इसे छोड़ चुका होता।"
सार्वजनिक परिवहन की दयनीय स्थिति
ढाका में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था चरमरा चुकी है। बसों में इतनी भीड़ होती है कि यात्री खड़े होने तक की जगह नहीं पाते। कई लोग दरवाजों से लटककर सफर करने को मजबूर होते हैं।
एक निजी बैंक अधिकारी, मारुफुल हक ने कहा, "ऑफिस टाइम में बस में जगह मिलना नामुमकिन होता है। लेकिन नौकरी छोड़ना कोई विकल्प नहीं है, इसलिए किसी भी तरह सफर करना पड़ता है।"
फुटपाथों पर चलना भी मुश्किल
यातायात की बदहाली और भीड़भाड़ सिर्फ सड़कों तक सीमित नहीं है। फुटपाथों पर पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है। मारुफुल हक बताते हैं, "हम रोज़ बसों में ठूंस-ठूंस कर सफर करते हैं, ट्रैफिक से जूझते हैं और थक-हारकर अपने गंतव्य तक पहुंचते हैं। यह हमारी रोजमर्रा की कड़वी सच्चाई है।"
क्या बांग्लादेश को चाहिए नई राजधानी?
भारत, पाकिस्तान, ब्राजील, मलेशिया, मिस्र और दक्षिण कोरिया जैसे कई देशों ने अपनी राजधानियां बदलने पर विचार किया है या पहले ही बदल चुके हैं। इसी तर्ज पर अब बांग्लादेश में भी राजधानी को दूसरी जगह स्थानांतरित करने की मांग उठ रही है।
पूर्वोत्तर बांग्लादेश हो सकता है विकल्प
शहरी योजना विशेषज्ञ डॉ. शम्सुल हक के अनुसार, "ढाका को तुरंत एक वैकल्पिक राजधानी की जरूरत है। पूर्वोत्तर बांग्लादेश, विशेष रूप से पूर्वाचल, इस उद्देश्य के लिए उपयुक्त विकल्प हो सकता है।"
उन्होंने आगे कहा, "पूर्वाचल ऊंचे भूभाग पर स्थित है और बाढ़ मुक्त है, जो एक राजधानी के लिए बेहद जरूरी विशेषता है। वहां की भूमि पहले से ही ठोस और मजबूत है, जिससे निर्माण लागत भी कम होगी।"
सरकार का क्या कहना है?
हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक राजधानी बदलने पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। लेकिन बढ़ती जनसंख्या और बिगड़ते हालात को देखते हुए यह विषय जल्द ही राष्ट्रीय बहस का हिस्सा बन सकता है।
क्या बांग्लादेश जल्द ही अपनी राजधानी बदलने वाला है? यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार और जनता इस पर क्या कदम उठाते हैं।