मास्को, 21 नवंबर उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) देश की तटस्थ स्थिति को कम किए बिना सर्बिया के साथ अपने संबंधों का विस्तार करने के लिए तैयार है। नाटो के प्रमुख जेन्स स्टोलटेनबर्ग ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
श्री स्टोलटेनबर्ग ने सर्बियाई राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वूसिक के साथ एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा, “हमने एक साथ अभ्यास किया है। इसका मतलब यह नहीं है कि यह सर्बिया की तटस्थता को कमजोर करता है। सर्बिया ने स्पष्ट किया है कि वह सैन्य गुटों के बाहर एक तटस्थ देश के रूप में रहेगा, लेकिन सर्बिया नाटो के साथ करीबी संबंध बनाए रखेगा और मिलकर काम करेगा, इससे नाटो और सर्बिया दोनों को फायदा होगा।”
नाटो प्रमुख ने कहा, “सर्बिया नाटो का एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय सक्रिय और लंबे समय से भागीदार है। हमारे सहयोग का एक ज्वलंत उदाहरण पिछले 10 वर्षों में नाटो के शांति कार्यक्रम के लिए विज्ञान हेतु किया गया संयुक्त कार्य है और हम विभिन्न क्षेत्रों में जिस तरह से एक साथ मिलकर काम करते हैं अपने आप में अलग है। शांति कार्यक्रम के लिए विज्ञान के तहत हम ऊर्जा, पर्यावरण सुरक्षा, उन्नत प्रौद्योगिकियों और साइबर रक्षा पर काम करते हैं।”
उन्होंने कहा कि सर्बिया ने जून में संयुक्त बहुराष्ट्रीय नाटो सैन्य अभ्यास प्लैटिनम वुल्फ 23 की मेजबानी की थी। इस अभ्यास में सर्बिया, अमेरिका, बोस्निया एवं हर्जेगोविना, ब्रिटेन, यूनान, इटली, हंगरी, रोमानिया और उत्तरी मैसेडोनिया से लगभग 600 सैनिक को सामरिक युद्धाभ्यास और पारस्परिकता के लिए प्रशिक्षित किया गया था।
वॉशिंगटन/नई दिल्ली – अमेरिका की संघीय सरकार द्वारा गठित यूएस कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम (USCIRF) ने भारतीय खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की है। मंगलवार को जारी अपनी वार्षिक रिपोर्ट में आयोग ने आरोप लगाया कि भारतीय खुफिया एजेंसी का संबंध सिख अलगाववादियों की हत्या की साजिशों से है। रिपोर्ट में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी पार्टी भाजपा का भी जिक्र किया गया है।
ढाका: बांग्लादेश की राजधानी ढाका को बदलने की मांग लगातार जोर पकड़ रही है। बढ़ती जनसंख्या, अव्यवस्थित शहरीकरण, ट्रैफिक जाम और बुनियादी सुविधाओं की कमी ने लोगों का जीना दुश्वार कर दिया है। स्थानीय नागरिकों और विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान परिस्थितियों में ढाका अब रहने योग्य नहीं रह गया है और देश को एक नई राजधानी की आवश्यकता है।
इस्लामाबाद। पाकिस्तान को एक और बड़ी कूटनीतिक शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा है। तुर्कमेनिस्तान में पाकिस्तान के राजदूत के.के. अहसान वगान को अमेरिका में प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई और उन्हें एयरपोर्ट से ही डिपोर्ट कर दिया गया। पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वगान लॉस एंजेलिस की निजी यात्रा पर थे, लेकिन अमेरिकी अधिकारियों ने इमिग्रेशन नियमों का हवाला देते हुए उन्हें देश में दाखिल होने से रोक दिया।