नयी दिल्ली, 21 जून विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि भारत ने यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में लड़ने के लिए रूसी सेना द्वारा भारतीय नागरिकों की भर्ती पर सत्यापित रोक लगाने की मांग की है, जबकि 10 भारतीयों को रिहा किया गया है और देश वापस भेज दिया गया है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मीडिया ब्रीफिंग में सवालों का जवाब देते हुए कहा, “हमने इस मुद्दे को फिर से उठाया है, और हम प्रक्रिया के साथ लगातार जुड़े हुए हैं। हम यहां और मॉस्को में रूसी अधिकारियों के साथ भी संपर्क में हैं, ताकि रूसी सेना में सेवा दे रहे भारतीयों को रिहा कर जल्द से जल्द भारत वापस भेजा जा सके।”
उन्होंने कहा कि मंत्रालय से अब तक संपर्क करने वाले भारतीयों की संख्या 20-25 है क्योंकि वे रिहा होना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि इनमें से 10 लोगों को रिहा कर दिया गया है और वापस भारत भेज दिया गया है।
प्रवक्ता ने कहा कि “हाल ही में जिन दो लोगों की मौत हुई है, हम उनके परिवार के सदस्यों के संपर्क में हैं। हम रूसी रक्षा मंत्रालय और विदेश मंत्रालय के संपर्क में भी हैं, ताकि जल्द से जल्द उनके पार्थिव शरीर को भारत लाया जा सके।”
उन्होंने कहा कि “हमने भर्ती पर सत्यापित रोक लगाने की मांग की है और इस उम्मीद के साथ रूसी अधिकारियों के समक्ष पूरी ईमानदारी से मुद्दा उठाया है कि वे कार्रवाई करेंगे। यह हमारे लिए अत्यंत चिंता का विषय है और रूसी अधिकारी इस पर जल्द ही कार्रवाई करेंगे।”
इस महीने की शुरुआत में, विदेश मंत्रालय ने कहा था कि रूसी सेना द्वारा भर्ती किए गए दो भारतीय नागरिक मारे गए और इस मामले को रूसी अधिकारियों के साथ दृढ़ता से उठाया गया, साथ ही युद्ध लड़ रहे सभी भारतीयों की शीघ्र रिहाई और प्रत्यावर्तन की मांग की गई।
विदेश मंत्रालय ने इस महीने की शुरुआत में एक वक्तव्य में कहा कि इस तरह की गतिविधियां हमारी साझेदारी के अनुरूप नहीं होगी और हम भारतीय नागरिकों से रूस में रोजगार के अवसरों की तलाश करते समय सावधानी बरतने का भी आग्रह करते हैं।
वॉशिंगटन/नई दिल्ली – अमेरिका की संघीय सरकार द्वारा गठित यूएस कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम (USCIRF) ने भारतीय खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की है। मंगलवार को जारी अपनी वार्षिक रिपोर्ट में आयोग ने आरोप लगाया कि भारतीय खुफिया एजेंसी का संबंध सिख अलगाववादियों की हत्या की साजिशों से है। रिपोर्ट में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी पार्टी भाजपा का भी जिक्र किया गया है।
ढाका: बांग्लादेश की राजधानी ढाका को बदलने की मांग लगातार जोर पकड़ रही है। बढ़ती जनसंख्या, अव्यवस्थित शहरीकरण, ट्रैफिक जाम और बुनियादी सुविधाओं की कमी ने लोगों का जीना दुश्वार कर दिया है। स्थानीय नागरिकों और विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान परिस्थितियों में ढाका अब रहने योग्य नहीं रह गया है और देश को एक नई राजधानी की आवश्यकता है।
इस्लामाबाद। पाकिस्तान को एक और बड़ी कूटनीतिक शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा है। तुर्कमेनिस्तान में पाकिस्तान के राजदूत के.के. अहसान वगान को अमेरिका में प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई और उन्हें एयरपोर्ट से ही डिपोर्ट कर दिया गया। पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वगान लॉस एंजेलिस की निजी यात्रा पर थे, लेकिन अमेरिकी अधिकारियों ने इमिग्रेशन नियमों का हवाला देते हुए उन्हें देश में दाखिल होने से रोक दिया।