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रविवार ६ अप्रैल

अभया परिवार के मामले की सुनवाई कोलकाता हाई कोर्ट में, सुप्रीम कोर्ट ने दी अनुमति



नई दिल्ली/कोलकाता: सुप्रीम कोर्ट ने आर. जी. कर अस्पताल में डॉक्टर के बलात्कार और हत्या के मामले में पीड़िता के परिवार द्वारा दायर याचिका को कोलकाता हाई कोर्ट में स्थानांतरित करने की अनुमति दे दी है। मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने माता-पिता की अपील पर संज्ञान लेते हुए यह निर्णय सुनाया। सोमवार सुबह हुई सुनवाई में पीड़िता के माता-पिता की ओर से पेश हुईं वरिष्ठ वकील करुणा नंदी ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया कि बार-बार दिल्ली आना उनके लिए कठिन है, इसलिए मामले की सुनवाई कोलकाता हाई कोर्ट में होनी चाहिए। इस पर शीर्ष अदालत ने आदेश दिया कि अब इस मामले की सुनवाई हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति तीर্থंकर घोष की पीठ में हो सकती है।

सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची ने ली शपथ, हाई-प्रोफाइल मामले की पहली सुनवाई

सोमवार को ही वरिष्ठ न्यायाधीश जयमाल्य बागची ने सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीश के रूप में शपथ ली और पहले ही दिन उन्होंने मुख्य न्यायाधीश की पीठ में आर. जी. कर अस्पताल मामले की सुनवाई में भाग लिया। मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मामले की सुनवाई की और हाई कोर्ट में केस ट्रांसफर की अनुमति दी।

सीबीआई जांच से संतुष्ट नहीं अभया का परिवार

पीड़िता के माता-पिता सीबीआई की जांच से असंतुष्ट थे। उनका कहना था कि मुख्य आरोपी संजय के अलावा अन्य संदिग्धों की सही तरीके से जांच नहीं हुई है। इसी कारण उन्होंने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कोलकाता हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। हालांकि, न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष ने कहा था कि इस मामले से जुड़ी एक याचिका पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, इसलिए शीर्ष अदालत की अनुमति के बिना वे सुनवाई नहीं कर सकते।

इसके बाद पीड़िता के माता-पिता ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और कोलकाता हाई कोर्ट में सुनवाई की मांग की। सुप्रीम कोर्ट की अनुमति के बाद अब यह मामला हाई कोर्ट में न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष की पीठ के समक्ष सुना जाएगा।

परिवार को राहत, न्याय के लिए लड़ाई जारी

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से अभया के परिवार को राहत मिली है। पीड़िता की मां ने कहा, "हम अपनी बेटी के लिए न्याय की लड़ाई जारी रखेंगे। सीबीआई को जल्द से जल्द जांच पूरी कर रिपोर्ट सौंपनी चाहिए और बाकी दोषियों को भी गिरफ्तार किया जाना चाहिए।"

इस बीच, सुप्रीम कोर्ट में आर. जी. कर अस्पताल की घटना को लेकर स्वत: संज्ञान से चल रहे मामले की अगली सुनवाई 13 मई को होगी।


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